तेलंगाना : रंगारेड्डी जिला कलेक्टर के कार्यालय ने MANUU को एक शो कॉज़ नोटिस जारी किया.
नोटिस में कहा गया कि यूनिवर्सिटी को कुल 200 एकड़ ज़मीन (सर्वे नंबर 211 और 212, मानिकोंडा गांव, गंडीपेट मंडल) में आवंटित की गई थी. लेकिन केवल 150 एकड़ पर ही इमारतें बनी हैं. बाकी 50 एकड़ जमीन खाली पड़ी है.
जिसको लेकर रंगारेड्डी जिला अधिकारी ने नोटिस के जरिए यूनिवर्सिटी से पूछा कि क्यों न यह जमीन वापस ली जाए और इसे अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए रखा जाए. इस नोटिस के जरिए जिलाधिकारी ने यूनिवर्सिटी से 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया. बता दें कि यह नोटिस 2024 में हुई ऑडिट और जिला स्तर की मॉनिटरिंग कमिटी की सिफारिशों के आधार पर जारी किया गया था.
1 जनवरी 2026: नोटिस पर यूनिवर्सिटी के जवाब से और राजनीतिक हलचल शुरू हो गया. 1 जनवरी 2026 मानू के रजिस्ट्रार ने कलेक्टर को जवाब भेजा. उस नोटिस में यूनिवर्सिटी ने कहा कि वह नोटिस का विस्तृत अध्ययन कर रही है. जिसमें भविष्य की विस्तार योजनाओं जैसे एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल, नए कोर्स आदि के बारे में जानकारी देगी.
यूनिवर्सिटी की तरफ से नोटिस में यह भी बताया गया कि CPWD हैदराबाद से डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) का इंतजार है. जिसके बाद यूनिवर्सिटी की विस्तार के लिए HEFA/शिक्षा मंत्रालय से मंजूरी ली जाएगी. इसके लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से जिला कालेक्टर से शो कॉज का जवाब देने के लिए 2 महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया.
मामले को लेकर 6 जनवरी 2026 को भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तेलंगाना सरकार पर हमला बोला. उन्होंने राहुल गांधी को टैग करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार शिक्षा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ काम कर रही है.
Hello @RahulGandhi Ji,
— KTR (@KTRBRS) January 6, 2026
Are you even aware of what your government is doing in Telangana? Is this your idea of standing for education and minorities?
After the disgrace at HCU, where your CM bulldozed a green forest and crushed wildlife, bringing national shame to your party,… pic.twitter.com/rTzl6VpfOX
केटी रामा राव (KTR) ने कहा कि तेलंगाना मौजूदा सरकार द्वारा पहले हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (HCU) में जंगल पर बुलडोजर चलाने का काम किया. अब मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) की 50 एकड़ जमीन छीनने की कोशिश हो रही है. KTR ने कहा कि BRS छात्रों के साथ मिलकर अदालत और सड़क पर लड़ाई लड़ेगी.
7 जनवारी 2026 को छात्रों ने कैंपस के अंदर इस नोटिस को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध किया. साथ ही रैली निकाली गई. इस दौरान छात्रों ने इसे सार्वजनिक शिक्षा पर हमला बताया. साथ ही सरकार से नोटिस वापस लेने की मांग की. नोटिस को लेकर बीजेपी ने भी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार यूनिवर्सिटी की जमीनों को रियल एस्टेट के लिए हड़प रही है.

9 जनवरी 2026 तेलंगाना सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन ने स्पष्टीकरण दिया. मंत्री ने एएनआई को दिए बयान में साफ किया कि सरकार का MANUU की जमीन लेने का कोई इरादा नहीं है. जमीन पूरी तरह सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ रुटीन नोटिस था, ताकि जमीन का सही इस्तेमाल सुनिश्चित हो.
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कहा कि नोटिस के बाद 3 दिन पहले यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ने कलेक्टर से बात की और भविष्य की योजनाएं बताई. उन्होंने कहा कि कलेक्टर ने नोटिस वापस लेने का भरोसा दिया और प्रेस नोट भी जारी किया.
#WATCH | Hyderabad: Telangana Minister Mohammad Azharuddin says, "There has been a lot of talk about Maulana Azad University land. A lot of people have given their statements and I just want to clarify that the Govt does not have any intention to take the land of Urdu University.… pic.twitter.com/pLx48RA5kg
— ANI (@ANI) January 9, 2026
मामले को लेकर यूनिवर्सिटी के कुलपति सैयद ऐनुल हसन 29वें फाउंडेशन डे ने अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि ‘हमें वेबसाइट से कुछ हटाने को कहा गया, हम ऐसा क्यों करें? यह वहीं रहेगा’. वहीं TMREIS के MD फहीम कुरैशी ने छात्रों से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि मामला जल्द सुलझ जाएगा और सरकार एजुकेशनल संस्थानों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.













