“बच्चे मन के सच्चे, सारे जग की आँख के तारे। ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान को लगते प्यारे हैं।” 1968 में आई फिल्म दो कलियां का यह गीत, साहिर लुधियानवी जी की लेखनी और लता मंगेशकर जी की सुरीली आवाज़ में बच्चों की मासूमियत को बड़े खूबसूरत अंदाज में बयां करता है। शानदार लेखनी और सुरीली आवाज का संगम इस गीत को और भी मार्मिक बना देता है। गीत के बोल सिर्फ बच्चों की प्यारी दुनिया का वर्णन नहीं करते, बल्कि यह भी इशारा करते हैं कि इंसानी जिंदगी के तीन अहम फेज—बचपन, जवानी, और बुढ़ापे में सबसे निश्छल, आनंदमय और शानदार लम्हें बचपन के ही होते हैं, जिसे हर कोई जीना चाहता है। जब किसी छोटे से बच्चे से पूछें कि बड़े होकर क्या बनना है, तो उनके जवाब अलग-अलग होते हैं—डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस, आर्मी, पत्रकार, शिक्षक इत्यादि। उनकी महत्वाकांक्षाएं समय-समय पर बदलती रहती हैं क्योंकि समय के साथ वे खुद को अलग-अलग रूपों में देखना चाहते हैं। लेकिन जब किसी बुजुर्ग से पूछें कि अगर उन्हें जीवन एक और मौका दे, तो वे क्या बनना चाहेंगे? ज्यादातर का जवाब होगा—बच्चा। ताकि वे उस लम्हे में लौट जाएं, जिसमें राग-द्वेष न हो और दिल पर झूठ और मैल की लेयर न हो। बचपन के उस जादू में सभी लौटना चाहते हैं, जो किसी के लिए भी अनमोल है।
आज बच्चों का दिन है—वह दिन जो ख़ासकर बच्चों के लिए समर्पित है। यह दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के मौके पर मनाया जाता है क्योंकि उन्हें बच्चे बेहद प्रिय थे। उनका मानना था कि बच्चे बगीचे में कलियों की तरह हैं, जिन्हें सही मार्गदर्शन और प्यार से सींचा जाना चाहिए ताकि एक बेहतर समाज और भारत का निर्माण हो सके। यह तभी संभव है जब हम बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें। पंडित नेहरू बच्चों में सच्चाई और मासूमियत की झलक देखते थे और मानते थे कि बच्चों के दिलों में जो निश्छलता का भाव होता है, वही समाज में सकारात्मकता लाने का साधन बन सकता है। बच्चों पर जितनी मेहनत करेंगे, उतना अधिक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
आज भी दो कलियां के इस गीत की पंक्तियाँ पंडित नेहरू के विचारों की याद दिलाती हैं—”ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान को लगते प्यारे हैं।” इस गीत में बच्चों के प्रति वही सम्मान और प्यार देखने को मिलता है, जिसे नेहरू जी बच्चों के प्रति महसूस करते थे। बाल दिवस पर इस गीत की गूँज हमें याद दिलाती है कि बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। वे ही आने वाला कल हैं, जिनके कंधों पर देश की कमान आने वाली है। उनको अच्छे से तराशे जाने की जरूरत है, जैसे हीरे की चमक बढ़ाने के लिए उसे तराशा जाता है। बच्चों को अच्छी शिक्षा और सुरक्षित माहौल देकर समाज को समृद्ध बनाया जा सकता है।













