सुप्रीम कोर्ट ने 4 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के वे उम्मीदवार जो सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ पास करते हैं, वे सामान्य (ओपन) सीटों पर चयन के लिए पात्र होंगे।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए दिया। यह मामला जूनियर इंजीनियरों की भर्ती से जुड़ा था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामान्य सीटें केवल मेरिट के आधार पर सभी के लिए खुली होती हैं, जाति या श्रेणी के आधार पर नहीं। इस फैसले का आधार 1992 के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ निर्णय को बनाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वह व्यवस्था खत्म होगी, जिसमें उच्च अंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केवल उनकी आरक्षित सीटों तक सीमित कर दिया जाता था। नए नियम के अनुसार, पहले ओपन सीटें मेरिट के आधार पर भरी जाएंगी, उसके बाद आरक्षित सीटों पर चयन किया जाएगा, ताकि सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों को पहले अवसर मिले।
यह फैसला सरकारी भर्तियों में मेरिट आधारित चयन को और मजबूत करता है।













