दिल्ली सरकार में मंत्री रहे कैलाश गहलोत ने आम आदमी पार्टी (आप) की प्राथमिक सदस्यता और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल को लिखे पत्र में इस्तीफे की वजहों को स्पष्ट किया।
गहलोत ने अपने पत्र में लिखा, “शीशमहल जैसे कई शर्मनाक और अजीबोगरीब विवाद हैं, जो अब सभी को संदेह में डाल रहे हैं। अगर दिल्ली सरकार अपना अधिकांश समय केंद्र से लड़ने में बिताती है तो दिल्ली के लिए वास्तविक प्रगति नहीं हो सकती। मेरे पास पार्टी से अलग होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”
भाजपा में शामिल हुए गहलोत
इस्तीफा देने के बाद कैलाश गहलोत हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, दुष्यंत गौतम, और हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। उन्होंने भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली।
भाजपा में शामिल होने के बाद गहलोत ने कहा, “आम आदमी पार्टी छोड़ना आसान नहीं था। यह फैसला मैंने एक रात में नहीं लिया।”
आप को कितना बड़ा झटका?
कुछ हफ्ते पहले तक कैलाश गहलोत, अरविंद केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की बात कर रहे थे। उन्होंने खुद को “केजरीवाल का हनुमान” भी बताया था, लेकिन अब वह पार्टी को अलविदा कह चुके हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व गहलोत से नाराज था। यह भी दावा किया गया कि पार्टी को उनके पार्टी छोड़ने का अंदेशा पहले से था और उनके विकल्प की तलाश शुरू हो गई थी।
एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “2020 के विधानसभा चुनाव, 2017 के एमसीडी चुनाव और हालिया लोकसभा चुनावों में गहलोत अपनी सीट पर प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर पाए। इसके अलावा, केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद झंडा तोलन को लेकर हुए विवाद से गहलोत काफी नाराज थे।”
आप को क्या नुकसान?
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “राजनीति में परसेप्शन बहुत मायने रखता है और परसेप्शन के स्तर पर आप को बड़ा झटका लगा है। एक वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री का पार्टी छोड़ना आप के लिए बड़ी चुनौती है। केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद पार्टी पहले से ही परसेप्शन की लड़ाई लड़ रही है।”
गहलोत का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उनके भाजपा में शामिल होने से आगामी चुनावों में पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
भाजपा को कितना फायदा?
आप के पूर्व नेता और वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने कहा, “कैलाश गहलोत जन नेता नहीं हैं, इसलिए भाजपा को कोई बड़ा फायदा नहीं होगा। हालांकि, जहां से गहलोत चुनाव लड़ते हैं, वहां भाजपा को लाभ हो सकता है। यह फैसला आप के लिए झटका है, लेकिन अगर मनीष सिसोदिया, संजय सिंह या गोपाल राय जैसे नेता पार्टी छोड़ते, तो नुकसान कहीं ज्यादा होता।”
कैलाश गहलोत का इस्तीफा आम आदमी पार्टी की आंतरिक कलह और कमजोर होती नेतृत्व क्षमता को उजागर करता है। यह पार्टी के लिए एक गंभीर झटका है, जो पहले से ही परसेप्शन संकट और असंतोष का सामना कर रही है। भाजपा के लिए यह कदम प्रतीकात्मक रूप से फायदेमंद है, लेकिन गहलोत की सीमित राजनीतिक पकड़ इसे सियासी मास्टरस्ट्रोक नहीं बनाती। यह घटना दिल्ली की राजनीति में विश्वास और रणनीति के संकट को रेखांकित करती है।













