Author – Nargis
नई दिल्ली: केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) मंत्री जीतन राम मांझी ने 43वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF) में शनिवार को ‘खादी इंडिया पवेलियन’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने ने अपने भाषण में कहा कि “ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में केंद्र सरकार स्वदेशी उत्पादों के प्रचार-प्रसार को लेकर जोर-शोर से काम कर रही है और हम स्वदेशी वस्तुओं का उत्पादन करने वाले उद्यमियों की भी हर तरह से मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
प्रतिगति मैदान में चल रहे 43वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2024 में भारत के हस्तशिल्प और खादी उद्योग को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारत मंडपम के हॉल नंबर छह में खादी इंडिया का पवेलियन लगाया गया है ,इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों को न केवल भारतीय बाजार बल्कि वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाना है। केंद्रीय मंत्री मांझी ने कहा कि ‘नए भारत की नई खादी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी । उन्होंने बताया कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) जल्द ही एक नई योजना लेकर आ रहा है, जिसके तहत खादी के विपणन और निर्यात को पुनर्गठित किया जाएगा। इस योजना के जरिए युवाओं को खादी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इसमें फैशन डिजाइनरों और युवा उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र भारत के लाखों कारीगरों और उद्यमियों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी मानते हुए सरकार ने इसके विकास और विस्तार के लिए कई योजनाएं बनाई हैं।
यह मेला खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों और कारीगरों को अपनी रचनात्मकता और उत्पादों को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करने का अवसर देता है। पवेलियन में खादी के कपड़े, हैंडबैग, जैविक उत्पाद, हस्तनिर्मित सामान और घर की सजावट के सामग्रियों की व्यापक श्रृंखला उपलब्ध है। इससे न केवल खादी उत्पादों की बिक्री में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की आय और रोजगार में भी इजाफा होगा।
खादी न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत विशेष पहचान दिलाने की योजना बनाई जा रही है। मंत्री ने यह भी बताया कि खादी अब केवल पारंपरिक परिधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रयोग फर्निशिंग, सजावटी सामान, और आधुनिक परिधानों में भी किया जा रहा है।
इस मेले के जरिए खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र की ओर लोगों का रुझान बढ़ाने और इसे आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। खादी इंडिया पवेलियन भारतीय संस्कृति, कला और आत्मनिर्भरता का अद्वितीय संगम बन गया है।
खादी के उत्पादों और नवाचारों का लाइव प्रदर्शन
पवेलियन में खादी के ऐतिहासिक उत्पादों और नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसमें देसी चरखा, पेटी चरखा, इलेक्ट्रिक कुम्हार का चाक, कच्ची घानी से तेल निकालने की प्रक्रिया, और अगरबत्ती बनाने का लाइव प्रदर्शन शामिल है। खास बात यह रही कि मंदिरों में इस्तेमाल होने वाले फूलों से रीसायकल की गई अगरबत्तियां भी प्रदर्शित की गईं, जो पर्यावरण संरक्षण और नवाचार का अद्भुत उदाहरण हैं।
युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना थीम पवेलियन
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर खादी (COEK) द्वारा स्थापित थीम पवेलियन युवाओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना। यहां खादी के नए ट्रेंड्स, फैशन के साथ उसके सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया गया है। इस पवेलियन ने खासतौर पर उन युवा दर्शकों का ध्यान खींचा, जो खादी को आधुनिक जीवनशैली में अपनाने के इच्छुक हैं।
व्यापार मेले का उद्देश्य और महत्व
43वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का मुख्य उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देना है। इस मेले का विषय “सतत विकास के लिए समान अवसर” रखा गया है, जो भारत की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करने और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करने का प्रतीक है। खादी इंडिया पवेलियन इस उद्देश्य का प्रतीक है और आत्मनिर्भरता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करता है।













